एक दर्दभरी कविता “खामोशियाँ”

एक दर्दभरी कविता "खामोशियाँ"

[su_heading]खामोशियाँ[/su_heading]

दोस्तों आज हम एक sad poem in hindi या एक दर्दभरी कविता “खामोशियाँ” लेकर के हाजिर हुए हैं जिसमें एक प्रेमिका अपने प्रेमी के बदले हुए स्वरूप को बयान कर रही है |

घर में ही छिपी रहतीं
जाने कितनी खामोशियाँ
जिनको देख नहीं पाती
तेरी नज़र की सुस्तियां

मैं भी यहीं तू भी यहीं
लेकिन अब चाहत कहाँ
तेरी वजह से कई नाते
लेकिन अपना रिश्ता है कहाँ
घर में ही छिपी रहतीं
जाने कितनी खामोशियाँ

हर रोज़ ही होता मिलना
ना रहीं पुरानी नज़दीकियां
मैं गुम तुझ में तू गुम खुद में
इस मुलाक़ात का क्या फायदा
घर में ही छिपी रहतीं
जाने कितनी खामोशियाँ

मेरी हँसी मेरी खुशी की
अब तू फिक्र करता कहाँ
मैं क्या पहनुं कैसा दिखूँ
इस से ना कुछ तेरा वास्ता
घर में ही छिपी रहतीं
जाने कितनी खामोशियाँ

कहता है तू तुझे इश्क़ है
फिर क्यों देता इतनी सज़ा
मैं अब तक उम्मीद लिए बैठा
तू निभाएगा एक दिन वायदा
घर में ही छिपी रहतीं
जाने कितनी खामोशियाँ

प्यारे मित्रों यदि आपको ये पोस्ट एक दर्दभरी कविता “खामोशियाँ” पसंद आए तो इसे social account पर शेयर करें|आप यह भी पढ़ सकते हैं
* देश प्रेम पर गीत
*watch this funny video

You May Also Like

About the Author: Editor sabkamanoranjan

दोस्तों आपका हमारी website sabkamanoranjan .in पर स्वागत है | इस website पर आपको information और entertainment दोनों एक ही जगह और एक नए अंदाज़ में मिलेंगे जो आपका भरपूर मनोरंजन करेंगे | यह website हर age group के लिए है | इस website की categories ये हैं :- Hindi poem ,baal kavita ,shayri , Hindi podcast ,Hindi song ,suvichar ,blogging ,online earning etc .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *