दीवानगी पर एक खूबसूरत कविता

दीवानगी पर एक खूबसूरत कविता
दीवानगी पर एक खूबसूरत कविता

कभी दीवाना बनकर देखिए
यह एक अलग ही है जहां
यहाँ मोहब्बत ही इबादत है
महबूब लगता है खुदा
यह एक अलग ही है जहां
यह एक अलग ही है जहां
यहाँ बिन शराब चढ़ता नशा
बेकरारी में बड़ा आता मजा
यार जिस रस्ते से गुजरा
उस धूल को सर माथे रखा
यह एक अलग ही है जहां
यह एक अलग ही है जहां
कहें लोग हम बीमार हैं
पर दीदार का इंतज़ार है
यार ही अपना मरज़
और यार ही अपनी दवा
यह एक अलग ही है जहां
यह एक अलग ही है जहां
यहाँ भूख भी ना प्यास है
हर वक़्त उसका ही अहसास है
एक पल लगा की शाम थी
अगले ही पल हो गई सुबह
यह एक अलग ही है जहां
यह एक अलग ही है जहां
बाकी रही ना कोई आरज़ू
उस पर ख़तम सब जुस्तजू
जिसको तराशना फर्ज़ मेरा
माशूक़ लगे नायाब हीरा
कभी दीवाना बनकर देखिए
यह एक अलग ही है जहां
यह एक अलग ही है जहां
यहाँ मोहब्बत ही इबादत है
महबूब लगता है खुदा
महबूब लगता है खुदा
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